कौन था सैयद मसूद गाजी जिसने सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण किया अब मेला कमेटी और प्रशासन क्यों आमने-सामने

 


1. सैयद सालार मसूद गाजी कौन था?
सैयद सालार मसूद गाजी महमूद गजनवी का भांजा था और उसकी सेना में एक सेनापति के रूप में कार्य करता था। महमूद गजनवी ने 1001 ईस्वी से भारत पर कई आक्रमण किए, जिसमें 1026 ईस्वी में सोमनाथ मंदिर पर किया गया हमला सबसे प्रसिद्ध है। इस आक्रमण में मंदिर का खजाना लूटा गया और कई क्षेत्रों को नष्ट कर दिया गया।

सैयद सालार मसूद गाजी भी इन सैन्य अभियानों में शामिल था। इतिहासकार मोहम्मद नाजिम की किताब 'द लाइफ एंड टाइम्स ऑफ सुल्तान महमूद ऑफ गाजना' के अनुसार, उसने भारत के विभिन्न हिस्सों में अपनी सेना के साथ लूटपाट और धर्मांतरण किया।

2. सैयद सालार मसूद गाजी और उत्तर प्रदेश का संबंध
सोमनाथ पर हमला करने के बाद, सैयद सालार मसूद गाजी अपने सैन्य अभियान को आगे बढ़ाते हुए उत्तर भारत पहुंचा। 1030 ईस्वी में वह बहराइच पहुंचा, जहां उसका सामना राजा सुहेलदेव से हुआ।

राजा सुहेलदेव श्रावस्ती के शासक थे और उन्होंने आसपास के 21 राजाओं के साथ मिलकर एक संयुक्त सेना तैयार की। बहराइच में दोनों सेनाओं के बीच भीषण युद्ध हुआ, जिसमें राजा सुहेलदेव की सेना ने सैयद सालार मसूद गाजी को पराजित किया और युद्ध में उसकी मृत्यु हो गई।

उसकी सेना ने उसे बहराइच में ही दफना दिया, और बाद में यह स्थान एक धार्मिक स्थल के रूप में प्रसिद्ध हो गया।

3. बहराइच में सैयद सालार मसूद गाजी की कब्र
12वीं सदी में दिल्ली सल्तनत के शासन के दौरान सैयद सालार मसूद गाजी की कब्र को एक मजार में बदल दिया गया।

दिल्ली के सुल्तान नसीरुद्दीन महमूद (1246-1266 ईस्वी) ने उसकी कब्र पर एक मकबरा बनवाया। धीरे-धीरे यह स्थान एक धार्मिक स्थल बन गया और दिल्ली के सुल्तानों के साथ-साथ आम लोग भी यहां आने लगे।

प्रसिद्ध यात्री इब्न-बतूता ने भी 13वीं सदी में अपनी यात्रा के दौरान यहां आने का उल्लेख किया है।

4. सैयद सालार मसूद गाजी की प्रसिद्धि और धार्मिक मान्यताएं
सैयद सालार मसूद गाजी को समय के साथ एक योद्धा संत के रूप में देखा जाने लगा। इतिहासकार शाहिद अमीन ने अपनी किताब 'कॉन्क्वेस्ट एंड कम्युनिटी: द आफ्टरलाइफ ऑफ वॉरियर सेंट गाजी मियां' में इस पहलू पर चर्चा की है।

उन्होंने लिखा है कि सैयद सालार को पशुओं की रक्षा करने वाला माना जाता था, जबकि उस समय के कई मुस्लिम आक्रांता पालतू जानवरों को भी मार डालते थे। इसके अलावा, उसे महुआ पेड़ और पान बेहद प्रिय थे, जो उत्तर भारत में उस समय लोकप्रिय थे।

एक कथा के अनुसार, जब वह बहराइच के सूरजकुंड नामक हिंदू धार्मिक स्थल पर पहुंचा, तो उसने वहां कोई नुकसान नहीं पहुंचाया और वहीं रहने लगा। इस तरह, समय के साथ उसकी छवि एक रक्षक और संत के रूप में विकसित हो गई।

5. सैयद सालार मसूद गाजी के नाम पर आयोजित मेले
बहराइच में उर्स मेला
बहराइच में हर साल मई महीने में उसकी दरगाह पर उर्स मनाया जाता है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। उर्स किसी सूफी संत की पुण्यतिथि पर मनाया जाने वाला धार्मिक उत्सव होता है।

इस मेले की शुरुआत देवा शरीफ (बाराबंकी) से आने वाली गाजी मियां की बारात से होती है। दिलचस्प बात यह है कि इसी दिन कुछ हिंदू संगठन राजा सुहेलदेव की जीत का उत्सव भी मनाते हैं।

संभल में नेजा मेला
संभल में सैयद सालार मसूद गाजी की याद में नेजा मेला लगता है। यह मेला होली के बाद के दूसरे मंगलवार को मनाया जाता है।

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