कानपुर देहात का नाम नहीं, दशा बदलने की ज़रूरत है
एक ग्रामीण नागरिक की सच्ची पुकार
हाल ही में केंद्रीय मंत्री श्री राकेश सचान ने कानपुर देहात का नाम बदलने का प्रस्ताव मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजा है। इसके साथ ही भोगनीपुर में इंडस्ट्रियल पार्क की भी घोषणा हुई है। लेकिन सवाल यह है: क्या सिर्फ नाम बदलने से ज़मीनी सच्चाई भी बदल जाएगी?
टूटी सड़कें, टूटी उम्मीदें
कुरवा खुर्द से जसौरा बिरसिंहपुर तक की सड़क सालों से जर्जर हालत में है।
कुसमा से पतरा तक की सड़क पूरी तरह से गड्ढों में बदल चुकी है।
और मैं ऐसी कई और सड़कों के नाम गिनवा सकता हूं जो आज भी खस्ताहाल हैं। बरसात के मौसम में ये सड़कें नाले और कीचड़ में तब्दील हो जाती हैं, जिससे आम नागरिकों का जीवन संकट में आ जाता है।
🚽 शौचालय सिर्फ नाम के
सरकारी फाइलों में भले ही हर गांव में सामुदायिक शौचालय बन चुके हैं, लेकिन हकीकत यह है कि:
- अधिकतर शौचालयों में ताले लटके हैं
- जहां खुले हैं, वहां सफाई, पानी और दरवाज़े नहीं हैं
- कई शौचालय बेकार जगहों पर बनाए गए हैं, जो उपयोग में नहीं आते
लाइटें हैं, लेकिन रोशनी नहीं
स्ट्रीट लाइट लगाने की योजनाएं बनीं, लेकिन:
- कई गांवों में लाइटें लगाई ही नहीं गईं
- जहां लगीं, वो कभी जलती ही नहीं
- कुछ गांवों में लाइटें जल्दी खराब हो गईं और कोई देखने नहीं आया
सफाई नाम की, ज़िम्मेदारी हमारी
गांवों में सफाईकर्मी महीने-महीने तक दिखाई नहीं देते। ग्रामीण खुद अपने घरों के आगे की नालियां साफ करते हैं। नदियों के किनारे बसे गांवों में तो सालों से कोई सफाईकर्मी नहीं पहुंचा।
1031 गांवों की ज़मीनी हकीकत कौन देखेगा?
कानपुर देहात के 1031 गांवों में से कितनों में माननीय मंत्री जी या अधिकारी खुद गए हैं? क्या आपने कभी कुरवा खुर्द, जसौरा, पतरा या कुसमा की सड़कों पर चलकर देखा है?
मेरे पास हैं सबूत
मैं जो कुछ कह रहा हूं, उसके पास तस्वीरें, वीडियो, रिपोर्ट्स और लोकेशन टैग
मेरी आपत्ति नाम से नहीं, नीति और प्राथमिकता से है
मुझे "कानपुर देहात" नाम से कोई आपत्ति नहीं है। हमें आपत्ति है — गांवों की उपेक्षा से।
नाम बदलने से पहले ज़मीन बदलनी चाहिए, हालात सुधरने चाहिए।
जनता को चाहिए व्यवस्था, न कि नाम
- हर गांव में सड़क
- साफ और चालू शौचालय
- जलती हुई स्ट्रीट लाइट
- नियमित सफाई व्यवस्था
- शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य की सुविधाएं
फिर आप चाहें तो नाम बदल दीजिए — हमें कोई आपत्ति नहीं होगी।
निष्कर्ष: पहले सुधार, फिर बदलाव
माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी, राकेश सचान जी और प्रशासन से मेरा अनुरोध है:
कृपया पहले गांव-गांव की दशा बदलिए, सड़कों पर चलिए, फिर आप नाम बदलिए — पूरा कानपुर देहात आपका स्वागत करेगा।
मैं यह लेख अपनी आंखों से देखी ज़मीनी सच्चाई के आधार पर लिख रहा हूं। मेरे पास हर बात का प्रमाण है। कृपया इस आवाज़ को हर ज़िम्मेदार अधिकारी, पत्रकार, जनप्रतिनिधि और जागरूक नागरिक तक पहुंचाएं।
