जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में फिर बरपा आतंकी कहर – 27 पर्यटको की हुई मौत दुर्घटना की पूरी जिम्मेदारी लश्कर ए तैयब पाकिस्तानी संगठन ने ली
"क्या कभी कश्मीर में सुकून लौटेगा?"
मरने वालों में न सिर्फ भारत के अलग-अलग राज्यों—उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, तमिलनाडु और ओडिशा—के लोग शामिल हैं, बल्कि एक यूएई और एक नेपाल के नागरिक भी मारे गए। कई लोग हनीमून मनाने या परिवार के साथ छुट्टियाँ बिताने आए थे।
हमले की जिम्मेदारी 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' (TRF) नाम के आतंकी संगठन ने ली है, जो लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा हुआ है। TRF का कहना है कि ये हमला “कश्मीर की जनसंख्या को बदलने” की कोशिशों के खिलाफ किया गया है।
कैसे हुआ हमला?
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, आतंकवादी अचानक जंगल से निकलकर आए और पर्यटकों की भीड़ पर गोलियां चलाने लगे।
सबसे दर्दनाक कहानी उत्तर प्रदेश से आए शुभम द्विवेदी की है। उसकी शादी को अभी सिर्फ दो महीने हुए थे और वह अपनी पत्नी के साथ हनीमून मनाने पहलगाम आया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक आतंकियों ने उससे पहले नाम पूछा और जैसे ही उसने अपना नाम बताया, उसे सिर में गोली मार दी गई। उसकी पत्नी बदहवास हालत में मौके पर ही बेहोश हो गई।
सरकार और सुरक्षा पर सवाल
हमला दिन-दहाड़े हुआ, वो भी एक टूरिस्ट स्पॉट पर—इससे सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठते हैं। शुरू में प्रशासन ने सिर्फ एक मौत की पुष्टि की, लेकिन चार घंटे बाद संख्या 27 तक पहुंची। इस देरी और कन्फ्यूजन ने साफ कर दिया कि सिस्टम अलर्ट नहीं था।
सरकार की प्रतिक्रिया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने इस हमले की कड़ी निंदा की है और कहा है कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। पूरे इलाके में सर्च ऑपरेशन जारी है, हेलिकॉप्टर से निगरानी की जा रही है और आतंकियों को पकड़ने के लिए सुरक्षा बलों को पूरी छूट दी गई है।
अंत में सवाल वही – कब खत्म होगा ये सिलसिला?
कश्मीर की वादियां खूबसूरत तो हैं, लेकिन वहां रहना या घूमने जाना कब तक जान पर बना रहेगा? सरकार कब तक सिर्फ बयान देती रहेगी? क्या अब वक़्त नहीं आ गया है कि लश्कर और TRF जैसे संगठनों का जड़ से खात्मा किया जाए?
अब फैसला सरकार को लेना है — सिर्फ जवाब नहीं, अब कार्रवाई चाहिए।
